छत्तीसगढ़ सरकार का निर्णय सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रभक्ति और चरित्र निर्माण की दिशा में ऐतिहासिक पहल : आशीष जैन
सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने वाला सराहनीय निर्णय, राष्ट्र निर्माण में मिलेगी नई दिशा : आशीष जैन

बेमेतरा । गांव की किसान खबरें
रिपोर्टिंग : मनोज कुमार जिला ब्यूरो बेमेतरा
भाजपा सोशल मीडिया अल्पसंख्यक मोर्चा छत्तीसगढ़ के प्रदेश सहप्रभारी आशीष जैन ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा विद्यालयों में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र, भोजन मंत्र, गायत्री मंत्र एवं शांति मंत्र को शामिल किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे भारतीय शिक्षा व्यवस्था को संस्कारों और राष्ट्रीय मूल्यों से जोड़ने वाला दूरदर्शी कदम बताया है।
आशीष जैन ने कहा कि कुछ लोगों द्वारा इस निर्णय को धर्मनिरपेक्षता के विरुद्ध बताने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि यह किसी धर्म विशेष के प्रचार का विषय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रीय चेतना को सुदृढ़ करने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल परीक्षा उत्तीर्ण कराने वाले संस्थान नहीं होते, बल्कि उनका उद्देश्य जिम्मेदार, अनुशासित और संस्कारित नागरिकों का निर्माण करना भी होता है। विश्व की प्रत्येक विकसित सभ्यता अपने बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपनी संस्कृति, इतिहास और परंपराओं से भी परिचित कराती है। ऐसे में भारत यदि अपनी नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास करता है तो इसमें किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
आशीष जैन ने कहा कि सरस्वती वंदना ज्ञान के प्रति सम्मान का प्रतीक है, गुरु मंत्र गुरु परंपरा के प्रति श्रद्धा का संदेश देता है, भोजन मंत्र कृतज्ञता की भावना विकसित करता है, गायत्री मंत्र मन की एकाग्रता और सकारात्मक चिंतन को बढ़ावा देता है तथा शांति मंत्र संपूर्ण विश्व के कल्याण की कामना करता है। इनमें किसी भी धर्म या समुदाय के प्रति विरोध अथवा असहिष्णुता का भाव नहीं है।
उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का अर्थ अपनी संस्कृति और सभ्यता से दूरी बनाना नहीं, बल्कि सभी आस्थाओं का समान सम्मान करना है। भारतीय संविधान भी देश की सांस्कृतिक विरासत और विविधता के सम्मान की भावना को ही मजबूत करता है।
आशीष जैन ने कहा कि भारत की महान वैज्ञानिक और सांस्कृतिक परंपरा सदैव साथ-साथ विकसित हुई है। शून्य, गणित, आयुर्वेद, खगोल विज्ञान और दर्शन जैसे क्षेत्रों में भारत की विश्वव्यापी उपलब्धियां इसकी प्रमाण हैं। आधुनिकता और सांस्कृतिक चेतना परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे की पूरक हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी समाज सहित भारत की सभी परंपराओं का मूल भाव प्रकृति, मातृभूमि, जल, वन और ज्ञान के प्रति सम्मान है। इसलिए इस विषय को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय भारतीय संस्कृति और शिक्षा के व्यापक संदर्भ में समझने की आवश्यकता है।
आशीष जैन ने कहा कि आज विश्व के अनेक देश अपनी सांस्कृतिक पहचान को गर्व के साथ संरक्षित कर रहे हैं। भारत को भी अपनी हजारों वर्षों पुरानी ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत पर गर्व होना चाहिए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित अनेक सामाजिक संगठनों ने सदैव भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने का कार्य किया है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय विद्यार्थियों में अनुशासन, राष्ट्रभक्ति, कृतज्ञता, संस्कार और चरित्र निर्माण की भावना को मजबूत करेगा तथा विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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