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धान छोड़ उद्यानिकी की राह पर किसान, बढ़ी आय और बचा पानी

फसल विविधीकरण बना किसानों की तरक्की का आधार, दौलतराम साहू बने प्रेरणा

राजनांदगांव। गांव की किसान खबरें

जिले में खरीफ सीजन के दौरान फसल विविधीकरण की दिशा में किसानों का बढ़ता रुझान खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बना रहा है। कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन तथा तकनीकी सहयोग से किसान अब पारंपरिक धान की खेती के बजाय उद्यानिकी, दलहन और तिलहन जैसी कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों को अपना रहे हैं। इससे उत्पादन लागत कम होने के साथ किसानों की आय में वृद्धि हो रही है और जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है।

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राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम जंगलेसर में इस खरीफ सीजन में किसानों ने 21 एकड़ से अधिक भूमि पर धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलों की खेती करने का निर्णय लिया है। इस बदलाव में प्रगतिशील किसान दौलतराम साहू अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरे हैं।

दौलतराम साहू ने बताया कि वे लगभग 8 एकड़ भूमि में वर्षों से धान की खेती कर रहे थे, लेकिन अधिक पानी की आवश्यकता, बढ़ती लागत और मौसम पर निर्भरता के कारण अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा था। कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की किसान संगोष्ठियों और फसल विविधीकरण अभियान से प्रेरित होकर उन्होंने पिछले वर्ष अपनी भूमि के एक हिस्से में उद्यानिकी फसल की खेती की, जिससे उन्हें बेहतर लाभ प्राप्त हुआ।

सफल परिणामों से उत्साहित होकर उन्होंने इस वर्ष अपनी पूरी कृषि भूमि में धान के स्थान पर उद्यानिकी फसल लगाने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि इन फसलों में कम सिंचाई की आवश्यकता होती है, लागत भी कम आती है और बाजार में बेहतर मूल्य मिलने से अधिक मुनाफा प्राप्त होता है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा खरीफ वर्ष 2026 से धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी एवं कपास जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती करने वाले किसानों को 15 हजार रुपए प्रति एकड़ की आदान सहायता राशि देने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने इस किसान हितैषी पहल के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त किया।

दौलतराम साहू ने जिले के किसानों से स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध जल संसाधनों के अनुसार वैकल्पिक फसलें अपनाने की अपील करते हुए कहा कि फसल विविधीकरण केवल आय बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने का प्रभावी उपाय भी है।

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हेम कुमार सतनामी

मैं हेमकुमार सतनामी, राजनंदगांव (छत्तीसगढ़) से हूँ और गाँव की किसान ख़बरें! का मुख्य संपादक हूँ। मेरा उद्देश्य किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों की सच्ची व ज़मीनी खबरें आप तक पहुँचाना है। ताज़ा अपडेट के लिए Telegram और WhatsApp पर हमारे साथ जुड़ें।

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